महान इन्वेस्टर “वॉरेन बफेट” की कहानी

By | 15th February 2019

अमरीका के वॉरेन बफेट का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। दुनिया की कोई ऐसी कारोबारी पत्रिका या अखबार या टीवी चैनल नहीं है अमरीका के वॉरेन बफेट का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। दुनिया की कोई ऐसी कारोबारी पत्रिका या अखबार या टीवी चैनल नहीं है जिस पर उनके बारे में चर्चा नहीं होती है। बिल गेट और कार्लोस स्लिम के बाद वॉरेन दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रईस हैं। वॉरेन बफेट अगर आज दुनिया के सबसे धनी लोगों में गिने जाते हैं तो इसके कई कारण हैं। लेकिन हम यहाँ वारे बफेट के धनपति होने की वजह से उनकी चर्चा नहीं कर रहे हैं बल्कि बेतहाशा दौलत के मालिक होने के बावजूद उन्होंने जिस जीवन शैली को अपनाया है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

वॉरेन बफेट

वॉरेन बफेट

 

अपने देश में तो हम आए दिन नवधनाढ्य लोगों द्वारा अपनी दौलत के गुरुर में किए जाने वाले दिखावे और तड़क-भड़क को देखते रहते हैं। लेकिन वारेन बफेट दुनिया के किसी भी रईस से हर मायने में अलग हैं। कारोबार की पैनी समझ रखने वाले वॉरेन बफेट में कई ऐसी खूबियाँ हैं जो उनके नाम को एक अलग पहचान देती है।

 

वॉरन बफेट के पास कितनी संपत्ति है इसका तो कोई हिसाब नहीं मगर बिल गेट्स के बाद वे दुनिया के सबसे बड़े रईसों में गिने जाते हैं। फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक वॉरेन के पास 52.4 अरब की संपत्ति है, अगर इसे भारतीय रुपयों में गिना जाय तो यह राशि 2 हजार 620 अरब रुपये की होती है। अपनी संपत्ति का 80 प्रतिशत एक परमार्थिक संगठन को दान देकर वॉरेन बफेट अमरीका के इतिहास में इतनी बड़ी राशि दान करने वाले पहले आदमी हो गए।

 

वॉरेन आज भी उसी मकान में रहते हैं जो उन्होंने 1953 में अपने लिए खरीदा था।

अब जरा यह भी जान लीजिए कि वॉरेन बफेट ने इतनी अकूत संपत्ति कैसे अर्जित की और वे इसका करते क्या हैं।

अमरीका के ओमाहा के नेब्रास्का में 30 अगस्त 1930 में जन्में वॉरन बफेट के पिता शेअर बाजार में कारोबारी थे। 11 साल की उम्र में अपने पिता के साथ शेअर बाजार से अपने कारोबारी जीवन की शुरआत की और अपने जेब खर्च का पैसा निकालने के लिए अखबार भी बेचे। 13 साल की उम्र में बफेट ने अपना पहला आयकर रिटर्न दाखिल किया। उसे इस बात का अफसोस रहा कि उसने पैसा कमाने की शुरुआत बहुत देर से की। 15 साल की उम्र में वारेन ने अपेन हाईस्कूल के दोस्त के साथ मिलकर एक नाई की दुकान पर 25 डॉलर में पिन बॉल मशीन लगाकर अच्छा खासा पैसा बनाया, और इस पैसे से वॉरेन ने 40 एकड़ का एक फार्म खरीदा। इसके बाद वारेन ने अपनी कुशाग्र कारोबार बुध्दि क भरपूर उपयोग करते हुए शेअरों में निवेश करना शुरु किया और खूब पैसा कमाया।

 

20 साल की उम्र में अमरीका के प्रतिष्ठित हॉर्वर्ड स्कूल में प्रवेश न मिलने पर बफेट ने कोलंबिया बिज़नेस स्कूल में प्रवेश लिया। वहाँ वॉरेन ने बैंजामिन ग्रामह और डेविड डॉड जैसे अर्थशास्त्री गुरुओं से शेअर बाजार में निवेश करने के गुर सीखे।

 

वॉरेन बफेट को ओरेकल ऑफ ओमाहा यानि ओमाहा का सबसे बड़ा निवेशक कहा जाता है। वॉरेन ने अमरीका की कई बड़ी कंपिनयों में सबसे ज्यादा निवेश कर रखा है जिसमें कोकाकोला और जिलेट जैसी कंपनियाँ प्रमुख हैं। यानि इन कंपनियों की मिल्कियत किसी के पास हो असली मालिक तो वॉरेन बफेट ही है।

 

वॉरेन बफेट के पास जितन अकूत दौलत है उनकी जीवन शैली उतनी ही सरल। वॉरेन आज भी उसी घर में रहते हैं जो उन्होंने 50 साल पहले खरीदा था। वे अपनी कार खुद चलाते हैं, न तो उनके पास कोई ड्रायवर है न कोई सुरक्षा गार्ड। वे कभी निजी विमान से यात्रा नहीं करते, जबकि उनके पास अपने दुनिया की सबसे बड़ी निजी विमान कंपनी के मालिक हैं। उनकी कंपनी बर्कशायर हेथवे के स्वामित्व में 63 कंपिनयाँ हैं। वे अपेन सभी सीईओ को साल में केवल एक बार पत्र लिखते हैं, जिसमें पूरे साल किए जाने वाले कामों के बारे में सुझाव भर देते हैं।

 

वे कभी अपने अधिकारियों या कारोबारियों के साथ कोई मीटिंग नहीं रखते। उन्होंने अपने सभी अधिकारियों को दो मूलमंत्र दिए हैं- एक, अपने शेअर होल्डर के धन का किसी भी तरह से नुक्सान मत होने दो और दूसरा, कभी भी पहले नियम को मत भूलो। वे अपना समय कभी भी ऊँचे और रसूखदार लोगों की होने वाली पार्टियों में नहीं बिताते। वॉरेन के पास न तो अपना कोई निजी मोबाईल फोन है न कंप्यूटर या लैपटॉप। खाली समय में वे या तो अपने लिए पॉपकॉर्न बनाकर खाते हैं या टीवी देखते हैं। पाँच साल पहले बिल गेट्स ने उनसे मुलाकात करने के लिए अदे घंटे का समय निकाला, मगर जब बिल गेट्स उनसे मिलने गए तो दोनों की यह मुलाकात आठ घंटे तक चली।

 

नई पीढ़ी के युवाओं को उनका संदेश है

क्रेडिट कार्ड की मानसिकता से दूर रहें और अपने आप पर ही निवेश करें।

संपत्ति ने मनुष्य का निर्माण नहीं किया है बल्कि मनुष्य ने संपत्ति ईजाद की है।

अपनी जिंदगी को जितनी सहजता और सरलता से जी सको, जीने की कोशिश करो।

 

दूसरे लोग जो कहते हैं वो मत करो, बस उनकी सुनो और वही करो जो करना आपके अपने हित में है, और उससे दूसरे का या समाज का कोई नुक्सान भी नहीं होता हो।जाने माने ब्रॉंड के कपड़े पहनने की बजाय ऐसे कपड़े पहनो जो आपके लिए आरामदायक हो।

 

अगर आपके पास पैसा है तो उसे अनावश्यक रूप से खर्च करने की बजाय उन लोगों पर खर्च करो जिन्हें इसकी जरुरत है।

आप अपनी जिंदगी खुद जिओ, दूसरों को अपना मालिक मत बनने दो।

हाथवे इंकारपोरेशन के प्रमुख वारेन बफे दुनिया की सबसे अमीर शख्सियत है, इस नजर से देखें, तो उन्हे किसी चीज की कमी नहीं है, पर निजी जिंदगी में बफे बेहद सादगी पसंद इंसान है। यहां तक निजी विमान से यात्रा के दौरान भी अपना सामान वह स्वयं उठाना पसंद करते है। बफे ने अपनी नई बायोग्राफी द स्नोबॉल वारेन बफे एंड द बिजनेस ऑफ लाइफ में निजी जिंदगी के कुछ राजदार पहलुओं का खुलासा किया है। बफे से सहयोग से यह बायोग्राफी एलिस श्रोडर ने लिखी है।

 

दृढ़ इरादों वाले उद्योगपति के रूप में एक अलग पहचान बनाने वाले बफे ने इस पुस्तक के जरिए दुनिया के सामने यह स्वीकार किया है कि उन्हे अपनी आलोचना से भय लगता है। पिता के लिए उनके हृदय में सदा खास स्थान रहा, किन्तु माँ से उनका ज्यादा लगाव नहीं था। बफे बताते है कि जब उनकी माँ की मृत्यु हुई तो मुझे दुख हुआ पर मेरे आंसू नहीं निकले। मेरी माँ अच्छी थी, पर उनके क्रोधी स्वभाव के कारण मैं कभी उनके निकट नहीं जा सका, जिंदगी में एक खालीपन बना रहा। बफे को जिस प्यार और अपनत्व की तलाश थी, वह जब उनकी पत्नी सूजी जिंदगी में आई तो पूरी हुई। बफे बताते है कि सूजी को पता था कि मुझे आलोचना से डर लगता है और यह भी कि मैं प्यार का भूखा हूं। सूजी को लगता था कि एक दिन जब उनके पास करीब एक करोड़ डालर की संपत्ति एकत्र हो जाएगी, तो बफे काम में डूबे रहने के बजाय अपना ज्यादा समय परिवार को देने लगेंगे, पर उन्हे कहां पता था कि बफे द्वारा धन कमाने का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। बफे और सूजी की तीनों संतानें जब बड़ी हो गई, तो सूजी सैनफ्रांसिस्को में रहने लगीं। सूजी से बेइंतेहा प्यार करने के बावजूद बफे को उनसे 27 साल अलग रहना पड़ा। डाक्टरों ने जब बफे को यह बताया कि सूजी को कैंसर है और उनका खाना-पीना अचानक कम हो गया, तो दुख और तकलीफ से बफे ने भी खाना-पीना कम कर दिया था। सूजी की मृत्यु के उपरांत बफे ने रेस्टोरेट होस्टेस एस्ट्रिड मेंक्ससे विवाह किया, जिन्होंने सूजी के अनुरोध पर उनकी गैरमौजूदगी में बफे का शिद्दत से ख्याल रखा। बफे कहते है कि जीवन में वह जिन स्त्रियों के ऋणी है, उनमें शैरोन ओसबर्ग का नाम शामिल है।

 

बफे के दोस्त माइक्रोसॉफ्ट प्रमुख बिल गेट्स बार-बार बफे को कंप्यूटर सीखने के लिए कहते, पर वह उन्हे राजी नहीं कर पाए। बफे को कंप्यूटर सिखाने का श्रेय शैरोन ओसबर्ग को जाता है। बफे मानते है कि उनकी महिला मित्र वाशिंगटन पोस्ट की प्रकाशक कैथरीन ग्राहम ने उन्हे उच्च वर्ग के लोगों के साथ मिलने-जुलने का सलीका सिखाया। कैथरीन ने ही उन्हे व्यापार से जुड़े दस्तावेज लिखित में तैयार करने का ढंग बताया। बफे को फिजूखर्ची उन्हे जरा भी पसंद नहीं। आज भी वह ओमाहा के उसी मकान में रहते है, जिसे उन्होंने 1958 में खरीदा था।

 

अगर आपके पास दौलत हो तो आप क्या करेंगे जाहिर है कि मकान बनवाएंगे लेकिन अगर आपके पास बेशुमार दौलत हो तो आप क्या करेंगे? आपका जवाब होगा, आलीशान मकान बनवाएंगे। लेकिन दुनिया में एक ऐसा खरबपति भी है जो आज भी एक पुराने मकान में रहता है जिसमें सिर्फ पांच कमरे हैं।जी हां हम बात कर रहे हैं दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति वारेन बफे की जिनके पास 5 कमरो का एक छोटा सा मकान है और वह भी 53 साल पुराना। लगभग 50 अरब की दौलत के मालिक वारेन बफे आज भी उसी मकान में रहते हैं जिसे उन्होंने 1953 में 31,500 डॉलर में खरीदा था। उनका यह मकान अमेरिका के ओमाहा में है।बफे का मानना है कि पैसा कमाने का एक रास्ता यह भी है कि उसे बचाया जाए। दरअसल बचत ही आपकी कमाई है। मितव्ययिता आपको और धनी बनाती है।

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