शेखचिल्ली और कुत्ते

By | 25th February 2019

जनाब शेखचिल्ली दुनिया में सिर्फ दो चीजों से डरते थे। घर में अपनी बीवी से और बाहर कुत्तों से। सो वह घर में बीवी और बाहर कुत्तों से ज़रा बचकर ही रहते। क्योंकि उन्होंने भी सुन रखा था कि भौंकने वाले कुत्ते काटते नहीं, लेकिन इस अफवाह पर उन्हें यकीन नहीं था। उन्हें यह भी लगता था कि क्या पता इस अफवाह से कुत्ते वाकिफ भी हैं या नहीं सो वह ऐसा ख़तरा उठाने की कभी सोचते भी नहीं थे, गाँव के कुत्तों को भी उनमें कोई रूचि नहीं रह गई थी। उनकी कद-काठी, पहनावा और शक्ल कुत्तों को ज़रा भी पसंद नहीं थी। शेख़ चिल्ली दुबले-पतले और नाटे तो थे ही उनका चश्मा अजीब ढंग से उनकी नाक पर टिका रहता था। एक दिन की बात शेख़ चिल्ली अपने चचा जान से मिलने के लिए बगल के गाँव में जा रहे थे। उस गाँव के अजनबी कुत्तों ने ऎसी अजीब शक्ल-सूरत वाला इंसान पहले कभी नहीं देखा था। आज जब पहले-पहल उन्हें ऐसा मौक़ा नसीब हुआ तो वे जोर-जोर से भौंकने लगे, वे इस अजीब इंसान का पीछा छोड़ने को तैयार न थे। जहां भी शेख़ चिल्ली जाते कुत्ते भी पीछे-पीछे भौंकते हुए लगे रहते। शेख़ चिल्ली ने कुत्तों को पीछा करते देख अपनी चाल बढ़ा दी। लेकिन वह जितना तेज चलते कुत्ते उतनी ही जोर से भौंकते। आखिरकार शेख़ चिल्ली के सब्र का बाँध टूट गया, उन्हें लगा कि ये बदमाश कुत्ते ऐसे नहीं मानने वाले, कुछ करना ही पड़ेगा। उन्होंने किसी हथियार की तलाश में इधर-उधर नजर फिराई। बगल में ही एक ईंट पड़ी थी। वह झुक कर उसे उठाने लगे। लेकिन ईंट हिल भी नहीं रही थी, वह तो जमीन में गड़ी थी। पूरी ताकत लगा देने के बाद भी शेख़ चिल्ली उसे उठाने में कामयाब नहीं हुए। वे नाराज़ हो गए और गुस्से से भरकर गाँव वालों को गालियाँ देने लगे। एक गाँव वाला उधर से गुजर रहा था। उसने शेख़ चिल्ली से उनकी नाराजगी का सबब पूछा।

 

“बड़ा अजीब गाँव है तुम्हारा” शेख़ चिल्ली गुस्से में ही चिल्लाए, ” यह भी कोई तरीका है, तुम लोग कुत्तों को खुला रखते हो और ईंटों को बांध कर.”।

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