Category Archives: लघु कथाएँ

तन से बढ़कर मन का सौंदर्य है

महाकाव्य ‘मेघदूत’ के रचयिता कालिदास ‘मूर्ख’ नाम से प्रसिद्ध हैं, जिनका विवाह सुंदर व महान गुणवती विघोतमा से हुआ था। उन महाकवि से राजा विक्रमादित्य ने एक दिन अपने दरबार में पूछा, ‘क्या कारण है, आपका शरीर मन और बुद्धी के अनुरूप् नहीं है?’ इसके उत्तर में कालिदास ने अगले दिन दरबार में सेवक से… Read More »

अहंकार छोड़िये और सीखना शुरू कीजिए

एक दिन श्रील चेतन्य महाप्रभु पुरी (उड़ीसा) के जगन्नाथ मंदिर में ‘गुरूड़ स्तंभ’ के सहारे खड़े होकर दर्शन कर रहे थे। एक स्त्री वहां श्रद्धालु भक्तों की भीड़ को चीरती हुई देव-दर्शन हेतु उसी स्तंभ पर चढ़ गई और अपना एक पांव महाप्रभुजी के दाएं कंधे पर रखकर दर्शन करने में लीन हो गई। यह… Read More »

तीन चोर

लंदन की चर्चित मिनिस्ट्री में सर एडवर्ड टॉमस निर्माण एवं यातायात मंत्री थे। एक बहुत बड़े निर्माण कार्य को संपन्न कराने के लिए उनके विभाग ने टेंडर निकाले। टेंडर भरने वालों में सर टॉमस का एक सहपाठी भी था। वह टॉमस से मिला। टॉमस ने कहा- ‘तुम सारी औपचारिकताएं पूरी कर दो, मैं तुम्हारे टेंडर… Read More »

मिदास का स्पर्श

अमेरिका के उघोगपपि एंड्रयू कार्नेगी अरबपति थे। ज बवह मरने को थे तो उन्होंने अपने सेक्रेटरी से पूछा – ‘देख, तेरा-मेरा जिंदगीभर का साथ है। एक बात मैं बहुत दिनों से पूछना चाहता था। ईश्वर को साक्षी मानकर सच बताओ कि अगर अंत समय परमात्मा तुझसे पूछे कि तू कार्नेगी बनना चाहेगा या सेक्रेटरी, तो… Read More »

कर्त्तव्य के प्रति महारथी कर्ण की निष्ठा

अमरीका में जीवन बीमा के विक्रय क्षेत्र में सार्वाधिक ख्याति प्राप्त फ्रैंक बैजर अपने व्यवसाय के आरंभिक काल में असफल हो चुके थे और उन्होंने अपने बीमा कंपनी के पद से पद से इस्तीफा देने का निर्णय ले लिया था। एक दिन वे इस्तीफा लेकर कार्यालय पहुंच गए। उस समय प्रबंधक महोदय अपने विक्रेताओं की… Read More »

मूल्यवान समय को व्यर्थ होने से बचाएं

सार्वभौम चक्रवर्ती सम्राट् होते हुए भी महाराजा अंबरीष भौतिक सुखों से परे थे और सतोगुण के प्रतीक माने जाते थे। एक दिन वे एकादशी व्रत का पारण करने को थे कि महर्षि दुर्वास अपने शिष्यों के सहित वहां पहुंच गए। अंबरीष ने उनसे शिष्यों सहित भोजन ग्रहण करने का निमंत्रण दिया, जिसे दुर्वासा ने स्वीकार… Read More »

भाग्य से बढ़कर पुरूषार्थ है

बात उन दिनों की है जब एक दिन पाटली-पु़त्र नगर में सम्राट अशोक गंगा नदी के किनारे टहल रहे थे। उनके साथ उनके मंत्रीगण, दरबारी व सैंकड़ों लोग भी थे। नदी अपने पूरे चढ़ाव पर थी। पानी के प्रबल वेग को देखते हुए सम्राट ने पूछा- ‘क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस प्रबल गंगा… Read More »

विनम्रता का परिचय

घटना उन दिनों की है जब इंगलैंड में डॉक्टर एनी बेसेंट अपने वर्तमान जीवन के प्रति निराश थीं और एक सार्थक जीवन जीने की ललक उनके ह्दय में तीव्रता से उठी थी। एक दिन अंधेरी रात्रि सभी परिवारजन गहारी नींद में सोए हुए थे। केवल वही जाग रही थीं और आत्मा की शांति के लिए… Read More »

तत्वों के उचित संयोजन से बनता है हमारा व्यक्तित्व

नरेन डे (स्वामी विवेकानंद) अपने छात्र-जीवन में आर्थिक विषमता से जूझ रहे थे। एक दिन उन्होंने अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस से कहा-‘यदि आप काली माँ से प्रार्थना करेंगे, तो वह मेरे वर्तमान आर्थिक संकट दूर कर देंगी।’ रामकृष्णजी बोले- ‘नरेन, संकट तुम्हारे हैं, इसलिए तुम स्वयं मंदिर में जाकर काली मां से मांगो, वह अवश्य… Read More »

गुरू-भक्ति से मन की शुद्धि

एक बार राजा मिलिंद भिक्षु के पास गए। भिक्षु का नाम नागसेन था। राजा ने भिक्षु से पूछा-महाराज एक बात बताइए, आप कहते हैं कि हमारा व्यक्तित्व स्थिर नहीं है। जीव स्वयंमेव कुछ नहीं है, तो फिर जो आपका नाम नागसेन है यह नागसेन कौन है? क्या सिर के बाल नागसेन हैं? भिक्षु ने कहा-… Read More »